किसान की व्यथा
किसान की अरदास (पेरोडी—बता मेरे यार सुदामा रे)
मुझे सही दांम दिला दे रे
सरकार घणा दुर सुं आया,
भर भर ट्रेक्टर ट्रॉली लाया,
गेंहू घाणा सुथरा लाया
मुझे सही दाम दिला दे रे,
सरकार घणा दुर से आया।।
साल भर बड़ी आश ले बैठा,
गेंहू दाम अनुता देगा,
कपडा लता टींगार के,
साडी घरआली के लायाँ,
मुझे सही दांम दिला दे रे
सरकार घणा दुर सुं आया,
धुप ने धुप नही म्हे जाणी,
टपकायो शरीर पसिनों पाणी,
दवाई माँ बाप रे रे,,
छोखो दाम मिले जद लायाँ,
मुझे सही दांम दिला दे रे
सरकार घणा दुर सुं आया।।
रचनाकार:-
मदन सिंह सिन्दल “कनक”
(कवि,लेखक)
सादडी,पाली,राजस्थान।
मुझे सही दांम दिला दे रे
सरकार घणा दुर सुं आया,
भर भर ट्रेक्टर ट्रॉली लाया,
गेंहू घाणा सुथरा लाया
मुझे सही दाम दिला दे रे,
सरकार घणा दुर से आया।।
साल भर बड़ी आश ले बैठा,
गेंहू दाम अनुता देगा,
कपडा लता टींगार के,
साडी घरआली के लायाँ,
मुझे सही दांम दिला दे रे
सरकार घणा दुर सुं आया,
धुप ने धुप नही म्हे जाणी,
टपकायो शरीर पसिनों पाणी,
दवाई माँ बाप रे रे,,
छोखो दाम मिले जद लायाँ,
मुझे सही दांम दिला दे रे
सरकार घणा दुर सुं आया।।
रचनाकार:-
मदन सिंह सिन्दल “कनक”
(कवि,लेखक)
सादडी,पाली,राजस्थान।
Nice
जवाब देंहटाएंM.s.kanak mama shree ji
जय श्री।धन्यवाद
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सा
हटाएंनाइस हुकम
जवाब देंहटाएंधन्यवाद हुकुम
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