देव नगरी- नारलाई

देव नगरी 
नगर बड़ा नगरी छोटी,
पर नगरी ऊपर नाज,
नाडूलाई नगरी की में
बात बतायुं आज,
सोनाना खेतल धणी,
सारंगवास में वास,
सारंगवास बसा हुआ,
नारलाई नगरी के पास,
दो दरवाजा नगरी प्रवेश,
देवत का स्थान,
भंवर गिरि में देख लो,
माँ गंगा का स्थान,
तपेश्वर नगरी बैठे,
भोले खारिवा,
बजरंगी गदा लिये,
दिखते हैं वहां,
चारभुजा को शीश नवायुं,
पुरजो सबकी आश,
ईला भेरवाय मदमस्त बैठे,
दरबार आप के पास,
बडेर तो नीचे रहा,
माई ऊपर बनायो धाम,
याचक आप से आश रखे,
माँ आई करदो पुरण काज,
बान्ध तीर चामुंडा बसे,
बड़ो आपरौ काम,
निवण करूं माँ आपने,
सकल सुधारो काज,
जैन मन्दिर की कमी नही,
हर गली गली में वास,
हिंगलाज माँ विराजे हैं,
दादावाडी के पास,
वराई मात जैकल बसे,
शिवलिंग रूप जाजमा-जैकल आज,
जाजमा लेटा हुआ,
 भोले बैठे जेकल नाथ।।

रचनाकार
मदन सिंह सिन्दल “कनक”
अध्यापक (कवि,लेखक)
सादडी,पाली,राजस्थान।



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