रक्तदान महादान
रक्तदान पर दोहे।
शौणित अपना दिजीये, जिस जन को है चाह।
जीवन दान तुम दे दो, निकल न जाये आह।।1।।
अपना रक्त बधाईये, कर कर के नित दान ।।
रक्तदान से तन स्वस्थ हो, पर बच जाये जान।।2।।
रक्तदान हैं महादान, जो करे सो जाने।
रक्तदान से जान बचे, रक्त ग्राहीक जाने।।3।।
रचनाकार
नाम- मदन सिंह सिन्दल “कनक”
अध्यापक (कवि,लेखक)
सादडी,पाली,राजस्थान।
शौणित अपना दिजीये, जिस जन को है चाह।
जीवन दान तुम दे दो, निकल न जाये आह।।1।।
अपना रक्त बधाईये, कर कर के नित दान ।।
रक्तदान से तन स्वस्थ हो, पर बच जाये जान।।2।।
रक्तदान हैं महादान, जो करे सो जाने।
रक्तदान से जान बचे, रक्त ग्राहीक जाने।।3।।
रचनाकार
नाम- मदन सिंह सिन्दल “कनक”
अध्यापक (कवि,लेखक)
सादडी,पाली,राजस्थान।
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