सावन आया

सावन आया
पवन चले पुरवाईयाँ,
गगन गरजे घन श्याम,
दामिनी प्रदीप्त करे,
रात दिन घन श्याम,
चले फुन्हारें झिनी झिनी,
माटी की महक भीनी भीनी,
करे सरिता शोर कल कल,
बढ़ी नालों की नित हलचल,
कोयल कूकती, चहकती चिडिया,
कृषक झुम रहे मदमस्त खेत में,
धरा ओढ़ ली हरियाली चदरिया,
जय घोष गूंजते हर शिव मन्दिर में,
श्रवण सोमवार व्रत करे नित,
प्रेम महोत्सव मिले सभी मित,
उमंग,उत्साह चहुँ दिश है छाया,
मधुमास सावन हैं जो  आया।।
रचनाकार
मदन सिंह सिन्दल “कनक”
सादडी,पाली,राजस्थान।


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