शुभ सवेरा
शुभ सवेरा
ब्रह्म मुहर्त में, रक्त लालिमा,
चिडिया की चहचहाट में,
बांग लगाता मुर्गा प्यारा,
ऐसा हो मेरा शुभ सवेरा,
ताम्रवर्ण सा उठता भानू,
सुबह की शीतल मन्द समीर में,
बुलबुल का मधुर राग वो न्यारा,
ऐसा हो मेरा शुभ सवेरा,
रोग भगाता योग सुबह का,
पक्षियों के मधुर कलरव में,
तरू पर्ण का राग वो प्यारा,
ऐसा हो मेरा शुभ सवेरा,
प्रात: स्मरण और ध्यान, साधना,
सजग समझ और शान्त सुबह में,
जीवन करदो अपना सुनहरा,
ऐसा हो सबका शुभ सवेरा।।
रचनाकार
मदन सिंह सिन्दल “कनक”
सादडी,पाली,राजस्थान।
सृजन ही संकल्प हैं।
ब्रह्म मुहर्त में, रक्त लालिमा,
चिडिया की चहचहाट में,
बांग लगाता मुर्गा प्यारा,
ऐसा हो मेरा शुभ सवेरा,
ताम्रवर्ण सा उठता भानू,
सुबह की शीतल मन्द समीर में,
बुलबुल का मधुर राग वो न्यारा,
ऐसा हो मेरा शुभ सवेरा,
रोग भगाता योग सुबह का,
पक्षियों के मधुर कलरव में,
तरू पर्ण का राग वो प्यारा,
ऐसा हो मेरा शुभ सवेरा,
प्रात: स्मरण और ध्यान, साधना,
सजग समझ और शान्त सुबह में,
जीवन करदो अपना सुनहरा,
ऐसा हो सबका शुभ सवेरा।।
रचनाकार
मदन सिंह सिन्दल “कनक”
सादडी,पाली,राजस्थान।
सृजन ही संकल्प हैं।
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