माँ
माँ पर दोहे
माँ ममता की मुरत हैं, हैं ईश्वर रूप।
मात सभी अनमोल हैं, हो राजा या भूप ।।1।।
मापनी- ऽ||ऽऽ|||ऽ,ऽऽऽ|ऽ||
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मात्रा-13,11
जग जननी तनदायनी, मंगलदायनी रुप।
धरती धीरज धारणी, परमात्मा प्रतिरूप ।।2।।
मापनी-||||ऽ||ऽ|ऽ,ऽ||ऽ|ऽ||
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मात्रा-13,11
मात जगत में गूढ़ हैं, मत बन तू अनजान।
कर जोड नित खडा रहे, देख उसमे भगवन।।3।।
मापनी- ऽ||||ऽऽ|ऽ,||||ऽ||ऽ|
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मात्रा-13,11
पय पिलाये निज तन का, भुजबल कर तैयार।
सौंप देश निज लाल को, बना भगत सरदार।।4।।
मापनी- ऽ||ऽ|||||ऽ,||||||ऽऽ|
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मात्रा-13,11
रचनाकार
मदन सिंह सिन्दल “कनक:
अध्यापक(कवि,लेखक)
कुम्भलगढ,राजसमन्द,
राजस्थान।
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