बेटी बचाओ।

  बेटी बचाओ ।
लिंगानुपात देखा तो होश ही उड़ गये,
बेटी बेटां से कम पाये रे,
बहुआं कहां से लाये रे,
अब तो समझ जाओ रे,
बेटी बचाओ रे। समझे,समझे,समझे बात,,,
बेटी बेटा से आज कम नही हाय्,
ऐरोप्लेन वो आज उडाये रे,
सीमि पर लडने वो जाये रे,
अब तो समझ जाओ रे, 
बेटी बचाओ रे। समझे, समझे, समझे बात,,,,
झांसी का समरांगण हो या 
मेवाड़ का मान हो,
पुत्र को बली वो चढाये रे,
वो लक्ष्मी, पन्ना कहां से लाये रे,
अब तो समझ जाओ रे, 
बेटी बचाओ रे। समझे, समझे, समझे बात,,,
बिन बेटी माँ कहाँ से लाये रे,
राखी को कैसे मनाए रे,
दादी, नानी कौन कहलाए रे,
पापा तुम्हें कौन बुलाये रे,
अब तो समझ जाओ रे, 
बेटी बचाओ रे। समझे,समझे,समझे बात,,,

 ‐---मदन सिंह सिन्दल #कनक (कुम्भलगढ)
                            अध्यापक
       रा.उ.प्रा.विद्यालय-चिमनपुरा(बाली)
                  जिला-पाली राजस्थान 
      चल दूरभाष-9602084896

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