संविधान के बोल।
●संविधान के बोल●
बोस का जय घोष हूँ मैं,शेखर का निशान हूँ,
पाण्डे के शोणित से लिखा,राष्ट्र का सम्मान हूँ,
सिन्धु सा विशाल मैं,विश्व में महान हूँ,
गणतंत्र हिन्द राष्ट्र का,मैं स्वाभिमान हूँ।1।
शहादत का बीज हूँ मैं, बलिदानी तेज हूँ,
भगतसिंह की मैं जवानी,सुख-गुरु का संदेश हूँ,
हिम गिरी सा अटल मैं, भीम सा बलवान हूँ,
गणतंत्र हिन्द राष्ट्र का,मैं स्वाभिमान हूँ।2।
निर्दोष का ढाल हूँ मैं, दोषी का काल हूँ,
रिपु,आतंकी,भ्रष्ट का तो,मैं महाकाल हूँ,
चेतक की टाप हूँ मैं, राणा का सम्मान हूँ,
गणतंत्र हिन्द राष्ट्र का मैं संविधान हूँ।3।
विश्व में विशेष हूँ मैं, वीरों का अवशेष हूँ,
गणतंत्र हिन्द का,मैं श्रीगणेश हूँ,
जौहर की ज्वाला में, केसरिया परिधान हूँ,
गणतंत्र हिन्द राष्ट्र का मैं संविधान हूँ।4।
राष्ट्र का स्वाभिमान हूँ मैं, राष्ट्र का अभिमान हूँ,
न्याय की कार्यप्रणाली, न्यायमूर्ति का कमान हूँ,
न्याय का तीर हूँ मैं, त्रिशूल समान हूँ,
गणतंत्र हिन्द राष्ट्र का, मैं संविधान हूँ।5।
वीरों का मैं हार हूँ, राष्ट्र का पहरेदार हूँ,
गरीब की आश हूँ मैं, अमीर का विश्वास हूँ,
जगत् गुरू माँ भारती का,मैं गुणगान हूँ,
गणतंत्र हिन्द राष्ट्र का, मैं संविधान हूँ।6।
---मदन सिंह सिन्दल #कनक
आप की हर एक कविता मेरे ह्रदय के बिल्कुल पास होती है ।
जवाब देंहटाएंजब भी टाइम मिलता है आप की कविता जरूर पड़ता हु।
आपका बहुत आभार व आशीर्वाद बना रहें।
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